LAW'S VERDICT

अवमानना में फंसी IAS संस्कृति जैन को मिली राहत, डिवीज़न बेंच ने सिंगल बेंच में चल रही सुनवाई पर लगाई रोक

मामला लंबित होने के बाद भी भोपाल में एक मकान का हिस्सा तोड़ने का मामला 

जबलपुर।  हाईकोर्ट की सिंगल बेंच द्वारा अवमानना में दोषी पाई गई भोपाल नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन को शुक्रवार को राहत मिल गई है। मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीज़न बेंच ने सिंगल बेंच में चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी है। डिवीज़न बेंच ने माना है कि सिंगल बेंच को अवमानना की कार्रवाई का कोई अधिकार नहीं है।  मामले पर अगली सुनवाई 18 फरवरी को निर्धारित की गई है। 

क्या है मामला 

हाईकोर्ट में यह मामला मर्लिन बिल्डकॉन प्रा.लि. के डायरेक्टर सतपाल सिंह भाटिया की ओर से दाखिल किया गया है। याचिका में कहा गया है कि श्यामला हिल्स के नादिर कॉलोनी में स्थित उनके 3520 वर्गफीट प्लाट की बिल्डिंग परमिशन 28 अगस्त 2025 को निरस्त कर दी गई। इस आदेश को चुनौती देकर यह याचिका 17 सितम्बर 2025 को दाखिल की गई थी।

पहले कार्रवाई फिर दिया नोटिस 

इस मामले में आरोप है कि हाईकोर्ट में याचिका विचाराधीन रहते नगर निगम ने 18 नवंबर 2025 को विवादित मकान के एक हिस्से को पहले गिराया और उसके बाद उसी दिन याचिकाकर्ता को नोटिस जारी किया। इस कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के खिलाफ पाते हुए हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को तलब किया था।

 सिंगल बेंच ने माना था दोषी 

मामले पर कल गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान कमिश्नर संस्कृति जैन कोर्ट में उपस्थित रहीं। अदालत ने कहा था कि जब मामला पहले से हाईकोर्ट और सिविल कोर्ट में लंबित था, तब निगम को किसी भी कठोर कार्रवाई से पहले न्यायालय की अनुमति लेनी चाहिए थी, जो नहीं ली गई। इन परिस्थितियों में कोर्ट ने कमिश्नर संस्कृति जैन को Contempt of Courts Act, 1971 की धारा 2(b) के तहत दोषी मानते हुए सजा की मात्रा तय करने के लिए 6 फरवरी 2026 को सुबह 10:30 बजे हाजिर होने कहा गया था। 
 

डिवीज़न बेंच ने कहा सिंगल बेंच को हक़ नहीं 

सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ भोपाल नगर निगम ने डीबी में अपील की। नगर निगम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह, अधिवक्ता एसएम गुरु और आकाश मालपाणी हाजिर हुए।  चीफ जस्टिस सचदेवा ने कहा- सुप्रीम कोर्ट के जिस आदेश के आधार पर सिंगल बेंच द्वारा अवमानना की जो कार्रवाई की जा रही, वह न्यायसंगत नहीं है। ऐसा इसलिए क्यूंकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में हाईकोर्ट को अवमानना की कार्रवाई करने के अधिकार ही नहीं दिया। यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना हुई है, तो कार्रवाई सिर्फ सुप्रीम कोर्ट कर सकती है। बेंच ने साफ़ किया कि अवमानना से जुड़े सिर्फ उन मामले में हाईकोर्ट को सुनवाई का अधिकार है, जिसमे उच्च न्यायालय या उसके अधीनस्थ न्यायालय के आदेशों की अवहेलना हुई हो। 

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